भारतीय सांस्कृतिक मंच भारतीय संस्कृति, साहित्य और राष्ट्रीय एकता के संवर्धन हेतु समर्पित संगठन है। हम विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता, संवाद और सहभागिता को बढ़ावा देते हैं।
12 दिसंबर 2005 के विशेष आयोजन में सम्मानित अतिथियों की उपस्थिति में पुस्तक विमोचन हुआ तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर सार्थक चर्चा हुई। मंच निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता है जो लोगों को प्रेरित, शिक्षित और एकजुट करें।
मानवाधिकार, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के लिए एकजुट प्रयास
वंचित वर्गों को निःशुल्क न्यायिक सहायता एवं कानूनी परामर्श प्रदान किया जाता है।
स्थानीय नागरिकों के सहयोग से सामाजिक न्याय एवं विकास को बढ़ावा दिया जाता है।
युवाओं को मानवाधिकार, संविधान और समाज के प्रति उत्तरदायित्व के लिए प्रेरित किया जाता है।
मानवाधिकार जागरूकता बढ़ाने हेतु संगोष्ठियों व सम्मानों का आयोजन किया जाता है।
महिलाओं को कानूनी अधिकार, शिक्षा व आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रशिक्षित किया जाता है।
स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान और पोषण संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
मानवाधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और विधिक सहायता—हम ज़मीनी स्तर पर असरदार बदलाव के लिए कार्यरत हैं।
हमारा ट्रस्ट आम नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों की जानकारी देता है और उल्लंघन के मामलों में मार्गदर्शन व सहयोग प्रदान करता है।
हम बच्चों और वयस्कों के लिए साक्षरता कार्यक्रम, रेमेडियल क्लासेज़ और करियर मार्गदर्शन चलाते हैं ताकि कोई भी शिक्षा से वंचित न रहे।
महिलाओं और किशोरियों के लिए कौशल विकास, स्व-सहायता समूह, डिजिटल साक्षरता और कानूनी परामर्श की सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं।
स्वास्थ्य शिविर, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, पोषण परामर्श और मासिक धर्म स्वच्छता पर वर्कशॉप आयोजित किए जाते हैं।
ज़रूरतमंदों को विधिक जानकारी, डॉक्यूमेंटेशन में सहायता, परामर्श और रेफ़रल सपोर्ट प्रदान किया जाता है।
बाल श्रम, बाल विवाह और शोषण के मामलों की रिपोर्टिंग/रोकथाम के लिए समुदाय के साथ मिलकर कार्य किया जाता है।
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भारत ने स्वतंत्रता के बाद से साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। National Statistical Commission Survey के अनुसार 2017-18 में साक्षरता दर 77.7% रही। UDISE+ 2019-20 के अनुसार प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक कुल 25.57 करोड़ बच्चों ने स्कूलों में नामांकन किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19.36 लाख की वृद्धि है। हालांकि, प्राथमिक स्तर पर 1.45% और माध्यमिक स्तर पर 12.61% बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी। Gender Parity Index (GPI) प्राथमिक स्तर पर 1.02 और माध्यमिक स्तर पर 1.00 है।
महामारी के चलते 92% बच्चों ने पिछली कक्षा की तुलना में कम से कम एक भाषा कौशल खो दिया। 82% बच्चों ने गणितीय कौशल भी खोया (Azim Premji Foundation, 2022)। बाल रक्षा भारत जैसे NGO, बच्चों को अतिरिक्त शिक्षण-सामग्री देकर Catch Up Clubs के माध्यम से ग्रेड-उपयुक्त भाषा और गणित कौशल विकसित करने में मदद करते हैं। यह सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा को भी महत्व देता है, ताकि बच्चे और शिक्षकों को सहयोगी, सुरक्षित वातावरण मिल सके। NGO for child education (Save the Children) बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित व सहयोगात्मक स्कूल वातावरण लौटाने में सहायता करता है।
अधिकतर सरकारी स्कूलों में लगभग सार्वभौमिक सुविधाएं हैं: 97% स्कूलों में बालिका शौचालय और स्वच्छ पेयजल सुविधा, 90% में हैंडवाशिंग, 85% में पुस्तकालय। आप बाल शिक्षा के लिए दान देकर इन स्कूलों का शैक्षणिक वातावरण बेहतर बना सकते हैं। हम स्थानीय संसाधनों से बना गुणवत्तापूर्ण शिक्षण-सामग्री उपयोग करते हैं, साथ ही स्मार्ट क्लासरूम और STEM लैब्स का निर्माण करते हैं।
हमारे नवीनतम प्रयासों, अभियानों और अपडेट्स के साथ जुड़े रहें, क्योंकि हम वंचित समुदायों को सशक्त बनाने और सभी के मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए काम कर रहे हैं।
जानें कि हम ग्रामीण क्षेत्रों में वंचित बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच कैसे बढ़ा रहे हैं।
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नेताओं और समुदाय के सदस्यों ने सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक विकास में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देने के लिए एकत्रित हुए।
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2006 में सामुदायिक नेताओं, पुलिस अधिकारियों और नागरिकों ने एकजुटता, सेवा और सांस्कृतिक गौरव का जश्न मनाने के लिए एक साथ भाग लिया।
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